Bade Ghar Ki Aaurtein Part 5

कुछ देर बाद हम अलग हुए। मैंने कपड़े पहनने शुरू किये तो कपड़े पहनते-पहनते भी उन दोनों ने मेरे लण्ड को एक-एक बार चूसा। फिर मैं दूसरे दिन का आने का वादा करके अपने कार्ड ले कर वापस आ गया। वो दोनों नंगी ही सिर्फ सैंडल पहने-पहने ही दरवाजे तक मुझे छोड़ने आयीं। उनके चेहरे पर अब भी वासना की झलक थी।

दूसरे दिन मैं दोपहर में तीन बजे मैं रेशमा के घर तय वक्त पर पहुँच गया। उसके पहले मैंने काफी घरों में कार्ड बाँट लिये थे। रेशमा ने दरवाजा खोला और मुझे देख कर मुस्करायी और मुझे खींच कर अंदर ले गयी। अंदर वो अकेली ही थी। मैंने उससे नसरीन के बरे में पूछा तो वो बोली कि वो तो एक घंटा पहले आने वाली थी पर कुछ काम की वजह से नहीं आयी लेकिन थोड़ी में आ जायेगी। दिखने में वो कयामत लग रही थी। उसने काले रंग की सिल्क की झीनी कमीज़ और घूटनों तक का सफेद स्कर्ट पहन हुआ था जिस पर काले फूलों का डिज़ाइन था। उसने कमीज़ नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी जिसके कारण उसके मम्मे झीनी कमीज़ के बाहर से साफ दिख रहे थे।

उसने मुझे सोफे पर बिठाया और बोली, “क्या पियोगे तुम… व्हिस्की… बियर..?” मैंने कहा, “जी बस एक छोटा सा पैग व्हिस्की का ले लुँगा!” ऊँची पतली हील के सैंडल खटखटाती हुई रेशमा किचन में चली गयी। रेशमा की लड़खड़ाती चाल और हाव-भाव से मुझे अंदाज़ा हो गया कि उसने आज पहले से ही कुछ ज्यादा शराब पी रखी थी। उसके कदमों के साथ-साथ ज़ुबान भी थोड़ी सी बहक रही थी। वो व्ह्सिकी और सोडे की बोतलें, बर्फ की बाल्टी और दो ग्लास ले आयी और दोनों के लिये पैग बनाये। फिर वो मुझसे सट कर बैठ गयी और हम ड्रिंक पीने लगे। उसने मुझे सिगरेट पेश की तो मैंने मना कर दिया कि मैं स्मोक नहीं करता। वो अपनी सिगरेट जलाती हुई बोली, “अच्छी बात है… पहले मैं भी स्मोक नहीं करती थी और ड्रिंक भी कभी-कभार ही लेती थी लेकिन जब से मेरे हसबैंड दुबई गये हैं, तो कुछ अकेलेपन की वजह से और कुछ नसरीन जैसी सहेलियों की सोहबत में ये सब आदतें पड़ गयीं।“

हमारे ग्लास खाली हुए तो रेशमा मुझसे और चिपक गयी और मेरी जाँघ सहलाने लगी और उसका हाथ मेरी पैंट की जेब में रखे कंडोम के पैकेट पर पड़ा। “ये क्या है?” उसने पूछा।“जी वो आपने कहा था ना… इसलिये आज मैं कंडोम लेकर लाया हूँ!” मैंने कहा तो उसने मेरी जेब में हाथ डाल कर कंडोम का पैकेट बाहर निकाला और फिर बे-परवाही मेज पर पटक दिया और मुझसे चिपकते हुए बोली, “इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी!” मैंने चौंक कर हैरान नज़रों से उसे देखते हुए पूछा, “आपने ही तो कल…” मेरी बात बीच में ही काट कर रेशमा चहकते हुए बोली, “वो क्या है कि कल हम दोनों पहले ही अपनी चूत टॉमी… उम्म्म मेरा मतलब है कल हमारा मन गाँड मरवाने का था इसलिये कंडोम का बहाना बनाया था!”अपनी समझ में तो उसने बात तो संभाल ली पर मैं समझ गया कि पिछले दिन मेरे आने के पहले ही दोनों कुत्ते से चुद चुकी थीं। तो इसी लिये कल वो कुत्ता इतना थका हुआ और सुस्त सा लग रहा था।

इतने में उसने पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड दबोच लिया और वो बोली, “अरे ये तो हरकत कर रहा है!” मैंने कहा, “आपकी चूत भी तो हरकत कर रही है!” वो बोली, “तुझे कैसे मालुम…? और ये आप-आप क्या लगा रखा है तूने?” तो मैं बोला, “तुम्हारे निप्पल जो खड़े हो रहे हैं! वो तुम्हारी पोल खोल रहे हैं!” वो अपने निप्पल दबाते हुए बोली, “तू तो छुपा रुस्तम है… रखता है तू!”फिर वो मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी। एक-एक करके उसने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल दिये ओर मेरी शर्ट निकाल दी। अब उसका हाथ मेरी पैंट पर था। वो घुटनों के बल नीचे बैठ गयी। उसने मेरी पैंट का हुक खोला और अपना मुँह आगे करके ज़िप को अपने मुँह से खोलने लगी। ज़िप खोलते ही पैंट नीचे गिर गयी। मेरा लण्ड और भी हरकत में आ गया जो अंडरवीयर को फाड़ने की कोशिश कर रहा था। उसने अंडरवीयर के ऊपर से ही लण्ड को किस किया ओर मुँह से अंडरवीयर उतारने लगी। मुँह में दाँतों से पकड़ कर उसने मेरे अंडरवीयर खींच कर उतार दी।

मेरा लण्ड टन्ना गया था। वो खड़ी हुई और अपने साथ मुझे भी खड़ा करके मेरा सिर पीछे से पकड़ कर मेरे होंठ अपने मुँह में ले लिये और चूसने लगी। मैंने भी उसकी गर्दन के पीछे उसके बालों को पकड़ लिया। हम दोनों की साँसें जोर-जोर से चल रही थी। मैंने उसकी कमीज़ के हुक खोल कर कमीज़ उतार दी। अब वो ऊपर से पूरी नंगी थी उसके मम्मे मेरे सीने से टकरा रहे थे। उसको मैंने और नज़दीक किया ओर उसकी स्कर्ट की पीछे की ज़िप खोल दी। स्कर्ट के नीचे कुछ नहीं था। अब वो ओर मैं दोनों बिल्कुल नंगे थे। उसने बस ऊँची पेंसिलहील वाले काले सैंडल पहन रखे थे। मेरा लण्ड उसकी चूत के आसपास टकरा रहा था। उसके गुलाबी होंठ मेरे मुँह में थे। दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा-टकरा कर आवाज़ कर रही थीं। मैं एक हाथ उसकी गाँड पर रख कर फेरने लगा और दूसरे हाथ से उसकी चूची दबा रहा था। उसकी नशीली साँसें और भी तेज हो गयी। उसकी आँखें बंद हो गयीं और उसकी चूत भी गीली हो गयी जिसका एहसास मेरे लण्ड को हो रहा था।

उसने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद नीचे बैठ कर मेरे लण्ड को चूसने लगी। बीच में रुककर उसने एक ग्लास में व्हिस्की भरी और फिर मेरा लण्ड उसमें डुबो-डुबो कर चूसने लगी। उसकी इस हरकत से मेरा लण्ड लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया था और मेरा पानी छूटने ही वाला था कि तभी दरवाजे की घंटी बज गयी। मेरे तो होश गुम हो गये। वो भी डर गयी। मैंने इशारे से पूछा कि कौन है तो वो बोली, “पता नहीं इस वक्त कौन मादरचोद मर गया… नसरीन होती तो आवाज़ देती… युँ घंटी ना बजाती!” उसके मुँह से गाली सुनकर मुझे थोड़ा अजीब लगा।

दरवाजे की घंटी लगातार बज रही थी। रेशमा अपने कपड़े पहनने के लिये उठाये और मुझे भी अपने कपड़े लेकर दूसरे कमरे मे जाने को कहा। वो अपने कपड़े पहन ही रही थी कि तभी बाहर से आवाज़ आयी, “रेशमा डार्लिंग! मैं नसरीन… दरवाजा खोल!” हम दोनों की जान में जान आ गयी। रेशमा सैंडलों में लड़खड़ाती दरवाजे तक नंगी ही गयी और दरवाजे की आड़ लेकर दरवाज़ा खोला ओर नसरीन अंदर आ गयी। उसने बुर्का पहन रखा था लेकिन चेहरे पर से नकाब उठा रखा था। सिर्फ उसके पैर दिख रहे थे जिनमें उसने सुनहरी रंग के काफी ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए थे।

हम दोनों को नंगा देख कर वो बोली, “मैं ज्यादा लेट हो गयी क्या?” रेशमा बोली, “नहीं अभी नहीं! पर तूने तो जान ही निकाल दी थी! पहले आवाज़ नहीं दे सकती थी क्या? तेरी कार की भी आवाज़ नहीं सुनायी दी!” नसरीन मुस्कुरा दी और रेशमा को बाँहों में लेकर उसके होंठ चूम लिये। नसरीन बोली, “कार की आवाज़ कैसे सुनायी देती… तुम दोनों अपने काम में जो मसरूफ थे!” नसरीन ने अपना बुर्का उतार कर एक तरफ फेंक दिया। अब वो बहुत ही हॉट लग रही थी। उसने गहरे गले वाला हल्के नीले रंग का कमीज़ पहना था जो स्लीवलेस था और सफेद रंग की चूड़ीदार सलवार पहनी हुई थी।

फिर नसरीन मेरे पास आयी और मेरे लण्ड को चूसने लगी। रेशमा भी मेरे पास आ गयी और नसरीन से बोली, “कपड़े उतार ओर पहले तू ही मरवा ले।” नसरीन मुस्कुराते हुए बोली, “हाय अल्लाह… आज तो कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रही है… क्या बात है? वैसे फिलहाल तो तुम दोनों ही जो कर रहे थे वो ज़ारी रखो.. मैं ज़रा बाथरूम में फ्रेश होकर आती हूँ!” रेशमा बोली, “ठीक है तेरी मरज़ी…!” मुझे देख कर नसरीन आँख मारते हुए बोली, “बस अभी आयी!” और अंदर चली गयी।

रेशमा मेरी गोद में बैठ कर फिर मेरे होंठ चूसने लगी और मैं उसके मम्मे दबाने लगा। नसरीन के सैंडलों की खटखटाहट सुनकर उस तरफ मेरा ध्यान गया तो देखा कि नसरीन ने अपनी कमीज़ और ब्रा दोनों उतार दी थी। हमारे पास आकर उसने मेज पर रखी व्हिस्की की बोतल उठायी और सीधे उसमें से पीने लगी। उसे देख कर रेशमा बोली, “अरे ये क्या! सीधे बोतल से ही पीने लगी! इरादा क्या है?

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